अंतरकी/💕बात कहनी हे बाबा…😋

​Aaoge jab tum o saajanaआओगे जब तुम ओ सजना dha pa  ni ni Sa Sa Sa Sa  Ga Sa ni अंगना फूल खिलेंगे🌷🌸💮🌹🌺🌻Angana phool khilenge

Ma Ma Ma Ga Re, Re Ga Sa ni Sa Sa बरसेगा सावन,⛈⛈Barsega saawan, Pa Pa Ga Re Ga Ma Ma ,Dha Ni’ Dha Ma Pa Pa झूम झूम केjhoom jhoomke

SA Pa Dha Ma  Ga Ga Ma Ga Reदो 💟💗ऐसे मिलेंगेDo dil aise milenge

Ma Ma Ga Re , Re Ga Sa ni Sa Sa

 Aaoge jab tum o saajana,

angana phool khilenge💚🌷🌹🌸🌺🌻🌼

Ma Ma Ma Ga Re, Re Ga Sa ni Sa Sa 👀 👁Naina tere kajraare hai,

Sa Re Ga Re Re Sa Ga Re Re

naino pe hum dil haare hai

ni Re ni dha  dha pa  Sa Sa Sa

Anjaane hi tere 😎naino ne

Sa Re Ga Re Re Sa Ga Re Re

waade kiye kayi saare hai

ni Re ni dha  dha pa  Sa Sa Sa

साँसों की लय मध्यम चले Saanson ki lay madham chalein, tose gaye

Ga Pa Dha Dha , Ga Pa SA Dha, Ga Dha Dha Pa

Barsega saawan,⛈⛈ barsega saawan

Pa Pa Ga Re Ga Ma Ma ,Dha Ni’ Dha Ma Pa Pa

jhoom jhoomkeSA Pa Dha Ma  Ga Ga Ma Ga Re

Do dil aise milenge

Ma Ma Ga Re , Re Ga Sa ni Sa Sa

🌜Chanda ko taaku 🌝🌘raaton mein, Sa Re Ga Re Re Sa Ga Re Re


 hai zindagi tere 👆haanthon 👐mein

ni Re ni dha  dha pa  Sa Sa Sa

Palkon pe jhilmil taarein hain,🌟⭐🌘

Sa Re Ga Re Re Sa Ga Re Re

aana bhari barsaaton mein

ni Re ni dha  dha pa  Sa Sa Sa

 Sapnon ka jahaan,

Pa Pa Re Re Sa Ga

hoga kela kela

Pa Pa Re Re Sa Ga

Barsega saawan, barsega saawan


Pa Pa Ga Re Ga Ma Ma ,Dha Ni’ Dha Ma Pa Pa

jhoom jhoomke

SA Pa Dha Ma  Ga Ga Ma Ga Re

Do dil 💗aise milenge

Ma Ma Ga Re , Re Ga Sa ni Sa Sa(^^)v(^o^)^_^:शिवबाबा के लिए अंतरके💕 उदगार।।।

મનની/💗 વાત કરવી છે મારે બાબા

મનની/💗ની વાત કરવી છે મારે બાબા?

ઓમ શાંતિ ઓમશાંતિ ઓમશાંતિ

મનને/💚ને કહી કહીને થાકી  કે મ જવાય? તું તો નાદાન છે. હે! મન/💜 તું એક વાત બરાબરસમજ…એક છે “ૐશાંતિ”શબ્દ નું રટણ બહારથી કરવું અને બીજું છે.. ૐશાંતિ સ્વરૂપ બોલતા મન/💙 એ સ્વરૂપ માં  ટકવું.. સાચા સ્વરૂપમાં માં મન/❤ છે  જ શાંત સ્વરૂપ…પછી બહાર શાંતિ શોધીએ તો તે ક્યાંથી મળશે? બાબાને મન/💛ની વાત સીધી કહી દઉં..

 

તેરી દુનિયામાં દિલ 💞લગતા નહીં ..મુજકો એ માલિક વાપસ બુલાલે… 


ઈસ પાપ કી દુનિયા સે કહીં ઓર લે ચલ જહાં ચૈન હી ચૈન હો..

એક હી તમન્ના હૈ  બસ.. તેરી એક યાદમાં બડી ચૈનસે.. શાંતિસે.. મૈં આત્મા ઈસ જગસે વિદાય લૂં.. ઈતની મહોલત શાયદ ઈસ નસીબકો મીલે.☺️

 

કહત કબીરા સુન મેરે સાધો .. જબ આયા થા તૂ જગમેં તો જગ હસે આપ રોય😧 અબ એસી કરની કરની ચલો આપ હસો ☺️જગ રોય. 😧

જીન્દઞી એક કેટ બાવન પત્તાની :-


જીન્દઞી નું દરેક વર્ષ=1પત્તુ લઈએ,
તો આપણે એક વાર આખે આખી કેટ,
એકવાર ચીપાઈ જાય પછી શું?
નવેસરથી શરૂઆત કરવાની?
પણ હા જોજો ફરી એકવાર ચીપવામાં
ભૂલ ના થાય, હવે તો આપણી સામે
એક ઉસ્તાદ ખેલાડી ઉપરવાળો બેઠો છે
ક્યારે રમત પૂરી થઈ જાય ના કહેવાય,
એ પણ ખબર નથી કે ઊંઘતા હતા કે
સપનું જોતાં..કે પછી જાઞતા કે પછી…
શક્યતાઓ રહેલી છે અનેક..માટે
હે આત્મન, કરના હૈ જો ભી કરલે..
કલ કરે સો આજ ઔર આજ કરે સો અબ…

😊Happy New Year 2017 & Good 👋 2016😊

એક પછી એક વર્ષો વિસ્તારમાં ગયા ને સાક્ષી બનીને જોતા ગયા અમે 

આ દુનિયામાં પલ પલ પલટાઈ જીંદગી થોડી ખાસ અને થોડી આમ રહી બસ

સૌને માટે શુભ ભાવના ઓ લાવી સાથમાં કરું એજ પ્રભુ ને પ્રાર્થના. 

ઓમશાંતિ.. ☺️😊8-)(^o^)

पांचों स्वरुप 

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❖ *पाँच स्वरुप की ड्रिल* ❖

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परमपिता परमात्मा ने आकर हमें हमारे 84 जन्मों और सृस्टि के आदि-मध्य-अंत का ज्ञान और स्मृति दिलाई है।जिनमें हमारे 5 स्वरूप का ज्ञान देकर हमें याद दिला रहे हैं कि – बच्चे हम क्या थे? क्या हैं और क्या बनने वाले हैं? जिनके अभ्यास से आत्मा वापस पावन, दिव्य और पुण्य आत्मा बन जाती है।

चारों ओर से ध्यान हटाते हुए अपनी भृकुटि की कुटिया में एक सुन्दर आकर्षक चित्र बनाये। यह जितना कल्पनातीत होगा उतना आपको आनंद आयेगा।
आइये अपने 5 स्वरूपों को जाने और अभ्यास करें –
❖ 1- *अनादि स्वरूप*🌟-
*अनादि स्वरुप में आत्मा बिंदी, बाबा बिंदी मन बुद्धि से पहुँच जाये परमधाम में* –
*अपने अनादि ज्योति स्वरूप को याद करे।परमधाम में*…
मैं मस्तक में चमकती हुई… बहुत ही तेजस्वी आत्मा…कर्मेन्दियों की मालिक…परम पवित्र आत्मा हूँ….मुझसे पवित्र किरणे निकलकर पूरी देह में फैल रही हैं…. इन किरणों से मेरा प्रत्येक अंग पवित्र हो रहा हैं….अब मैं आत्मा उड़ चली ऊपर की ओर…. सूक्ष्मलोक को पार कर… शांतिधाम में हूँ…शांतिधाम की सम्पूर्ण शांति मुझमें समा रही है….इसे महसूस करें….(जितनी देर तक कर सके)
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❖ 2- *आदि स्वरूप*👸-
*आदि स्वरुप – सतयुग में खुद को देवी-देवता स्वरूप में देखना।स्वयं को देवताई ड्रेस में देखना*।
देखे…. अब मैं आत्मा देवलोक में नीचे उतर रही हूँ….स्वर्ग में स्वयं को देखे… अपने देवता स्वरूप को….सुन्दर शरीर….चमकता हुआ चेहरा….डबल ताज… दूर-दूर तक सोने के महल और प्रकृति का सौन्दर्य….सम्पूर्ण सुख-शांति से सम्पन्न दुनिया…. मैं  सिंहासन पर विराजमान…. सर्वगुण सम्पन्न… सम्पूर्ण पवित्र….सतोप्रधान स्टेज में हूँ…
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❖ 3 – *पूज्य स्वरुप*👰-
*अपने पूज्य स्वरूप को याद करे। देखे मंदिरों में मेरी पूजा हो रही है*….
स्वयं को पूज्य स्वरूप में….मंदिर में विराजमान …ईस्ट देव और देवी के रूप में देखें…. हजारों भक्त मेरे दिव्य स्वरुप का दर्शन कर रहे हैं…. मेरे मस्तक से शांति की किरणे निकलकर सभी भक्तो को शांति प्रदान कर रही हैं….उनका मन शांत होता जा रहा है…
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❖ 4 – *ब्राह्मण स्वरुप*🙇-
*ब्राह्मण स्वरुप में स्वयं को संगमयुग में देखें*।
स्वयं भगवान मेरा बाप, टीचर और सतगुरु है….मैं गॉडली स्टूडेंट स्वयं बाप की छत्रछाया में सुरक्षित बैठ रूहानी पढ़ाई पढ़ रही हूँ….मैं सर्वश्रेष्ठ ब्राह्मण आत्मा हूँ… प्रभु पालना में पलने वाली महान आत्मा हूँ….स्वयं भगवान मेरा साथी है….
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❖ 5 – *फ़रिश्ता स्वरूप* 👼-
*अब विज़न बनाये… मैं फरिश्ता हूँ…लाइट माइट …फरिश्ता…देह और देह के बन्धनों से मुक्त*…….
मैं फरिश्ता …प्रकाश के शरीर में….. मेरे अंग-अंग से चारों ओर… लाइट माइट की किरणे…फैल रही हैं…  अब मैं फरिश्ता उड़ चला सूक्ष्म लोक में ….बापदादा मेरे सामने खड़े हैं…. मेरे मस्तक पर- ‘ *विजयी* *भव*: ‘का तिलक लगा रहे हैं…

 

जितनी-जितनी देर आप एक एक स्वरूप में टिकेगें।उतना-उतना आनंद व अनुभूति प्राप्त करेंगे।
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*पाँच स्वरूप योगाभ्यास की दूसरी विधि*

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सबसे पहले हम रिलेक्स होकर बैठे।
जब भी हम बैठक योग करते है तो एक पोजीशन में बैठना है। वैसे तो बाबा✨कहते है बाबा को याद करने के लिए कैसे भी बैठो, लेटो जैसे मर्ज़ी याद करो, पर बैठक योग में जरुरी है पालोथि लगाकर बैठे।और कमर एकदम सीधी हो। आँखें खुली हुई हो, योग के समय आँखें कभी बन्द ना हो। अब जिस तरह से अपने इस रथ की कर्मेंद्रिया समेट कर बैठे है- ठीक उसी तरह से अपने मन और बुद्धि को भी समेट लें-इस दुनिया की सभी स्मृतियो से।

इस दुनिया को दिखते हुए भी ना दिखे।
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💫💫 *योगाभ्यास/ड्रिल*💫💫
🌟 *अनादि स्वरुप* : – अब भृकुटि के बीच में अपना ध्यान केंद्रित करे… देखे कि भृकुटि के बीच में सफ़ेद रंग का एक चमकता हुआ तारा… आत्मा हूँ… मै आत्मा जो पुरे ब्रह्माण्ड की मालिक हूँ…..जब जहाँ चाहू घूम सकती हूँ… अब मै आत्मा इस पांच तत्वों से बने शरीर से निकल पड़ी हूँ… एक लम्बी यात्रा पर…. अब मै आजाद पंछी हूँ

….जहाँ चाहू उड़ सकती हूँ…मुझे किसी का कोई बंधन नहीं….मै चली जा रही हूँ अपने असली घर …शान्तिधाम की ओर… जहाँ शांति ही शांति हैं…. अब मुझ आत्मा को अपने घर आकर कितना सुकून मिल रहा है… अब मै आत्मा कुछ देर आराम कर…फिर से निकल पड़ी अपनी यात्रा पर…
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👸 *आदि स्वरुप* : – अब मै आत्मा अपने आदी स्वरुप में हूँ… अब मै आत्मा यहाँ संपन्न हूँ…गुणों, शक्तियों से भरपूर हूँ… यहाँ सुख, शांति से भरपूर हूँ… ना कुछ पाने की इच्छा -बस प्रेम ही प्रेम हैं…
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👰 *पूज्य स्वरुप* : – अब मै आत्मा अपने पूज्य स्वरुप में हूँ… मै इष्ट देवी हूँ… मै वैष्णो हूँ… मै आत्मा एक बहुत बड़े मंदिर में विराजमान हूँ… और मेरे भक्त मुझसे मिलने के लिए कितने व्याकुल है…. एक दर्शन की आश में कितनी कठिनाइयों को सह रहे है… कितनी लंबी लाइन लगी है… वास्तव में वो भक्त मेरे बच्चे है… और मै उनकी माँ… हर बच्चा अपनी माँ के पास अपनी इच्छा लेकर आया है….मै वैष्णो…सबकी इच्छा को पूर्ण कर रही हूँ…. सबकी मनोकामना पूर्ण कर रही हूँ…. सबकी आँखों में प्यार के आंसू है….
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🙇 *ब्राह्मण स्वरुप* : – अब मै आत्मा अपने ब्राह्मण स्वरुप में हूँ… ब्राह्मण अर्थात ब्रह्मा की संतान… मुझे परमपिता शिव परमात्मा ने ब्रह्मा द्वारा गोद लिया है… मै कितनी खुशनसीब आत्मा हूँ….जो मुझे स्वयं भगवान ने अपनाया है….अपनी गोद में बिठा….प्यार…दुलार दे रहे है….परमपिता शिव परमात्मा ने मुझे अपना वारिस बनाकर अपनी सभी शक्तियां दी है…और अब वही शक्तियां मै आत्मा पुरे विश्व को दे रही हूँ… मै विश्वकल्याणकारी आत्मा हूँ….अब मुझे अपने परमपिता के साथ मददगार बन पुरे विश्व का कल्याण करना है….
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👼 *फरिश्ता स्वरुप* : – अब मै अपने फरिश्ता स्वरुप में आ गयी हूँ….मेरा अब किसी भी देहधारी से कोई रिश्ता नहीं है….मै अब उड़ चली आसमान की ओर…उड़ता पंछी बन… सभी को उमंगो के पंख दे… उड़ाने…आहा उड़ता ही जा रहा हूँ… अब मै फरिश्ता यात्रा कर अपने शरीर मे पुनः विराजमान हो रही हू…..
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❖ *चार धाम की ड्रिल* ❖

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❖ ❖ *चार धाम की यात्रा*:- मन और बुद्धि से चले चार धाम की यात्रा करने के लिये:-
❖ 1. *शांतिस्तंभ( Tower of peace)*
*शक्तिशाली बनना हो तो शांति स्तम्भ पर पहुँच जाओ*।
मैं फरिश्ता बन पहुँच गयी शांति स्तम्भ के पास…कुछ समय के लिये अनुभव कर रही हूँ… सर्वशक्तिमान से सर्वशक्तियों की किरणें प्राप्त करती जा रही हूँ… मैं शांति के सागर से निकलती शांति की लहर हूँ… एक लहर जो सागर से निकलकर, शांति के vibrations चारों ओर बिखेरती हैं… और वापस शांति के सागर में समा जाती हैं… ऐसे मैं कभी अंत को न पाने वाली शांति की लहर हूँ…
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❖ 2. *हिस्ट्री हॉल में( Tower of knowledge)*
*व्यर्थ संकल्प चले और उनसे मुक्त होना हो तो हिस्ट्री हॉल में पहुँच जाओ*।
कुछ समय के लिये अनुभव कर रही हूँ… बाबा को सारा व्यर्थ- किचड़ा सौप रही हूँ… मैं ज्ञान के सागर की ज्ञानवान आत्मा हूँ… जो सारे विश्व में ज्ञान की ज्योत जगाने के निमित्त हैं… सच्चा-सच्चा गीता ज्ञान, जिस ज्ञान को सुनने मात्र से पत्थर बुद्धि मनुष्य- सर्वगुण सम्पन्न,16 कला संपूर्ण देवता बन जाते हैं… परमात्मा शिव का सत्य परिचय विश्व की आत्माओं को सुनाने के निमित्त हूँ…
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❖ 3. *बाबा के कमरे में( Tower of might)*
*बाप समान बनने का संकल्प हो तो बाबा के कमरे में पहुँच जाओ*।
अपने पिता के साथ कुछ समय के लिये अनुभव कर रही हूँ… शक्तियों के भण्डार की मैं शक्तिशाली भुजा हूँ… ये मेरा परम सौभाग्य है की मैं ऑलमाइटी अथॉरिटी,सुप्रीम फादर शिव द्वारा विश्व परिवर्तन के इस महान कर्तव्य में सहयोगी भुजा हूँ…
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❖ 4. *बाबा की झोपड़ी में( Tower of purity)*
*यदि बाबा से रुहरिहान (वार्तालाप) करनी हो तो बाबा की झोपड़ी में चले आओ*।
अपने खुदा दोस्त के साथ अनुभव कर रही हूँ… मेरे खुदा दोस्त को मेरे दिल की सारी बातें बता रही हूँ… पवित्रता के सागर द्वारा चुनी हुई वो महान आत्मा हूँ जिस पर सदैव बाबा ने भरोसा किया हैं… उन्होंने मुझे उस परम पवित्र दुनिया में चलने के लायक समझा… ये मेरी खुशनसीबी है कि मैं परमात्मा द्वारा चुनी हुई ऐसी पवित्र आत्मा बन रही हूँ…..
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✶ ओम शांति ✶

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આપસે સિતારા 💥કિસ્મતકા બુલંદ હૈ…

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મેરે મીઠે મીઠે પ્રાણ પ્યારે, ભાગ્યવિધાતા શિવબાબા, આપકા કિતના ન શુક્રિયા માનું ઉતના હી કમ હૈ,  હે મીઠે બાબા આપકી નજર જો મુજ આત્મા પર પડી મૈં તો ધન્ય ધન્ય હુઈ ઔર મેરે ભાગ્યકા સિતારા બુલંદીયોકો છુ ગયા, તેરી એક નજરસે મૈં નિહાલ હુઈ તો મેરી દુનિયા કે સારે નજારે બદલ ગયે,
વરના મૈં તો ઈસ ધરાકી ધૂલ થી, એક રેતકા જર્રા થી, જીસે 💓કે આસમાંમેં 👆ચમકતા હુઆ 🌟 બના દિયા, જીવનભર નહીં ભૂલેંગે વો તેરા પ્યાર ને મધુબનમેં જો દિયા હૈ,
હે પારસનાથ બાબા આપને હમપર અનગિનત ઉપકાર કિયે હૈ…મુજ પત્થરબુધ્ધિ આત્માકો પારસ એક નજરસે હી બના દિયા. યે 💝તો આપકા અહેસાનમંદ હૈ…
હે મેરે મીઠે મીઠે બબુલનાથ બાબા મુજે કાંટેસે ફૂલ બનાયા હૈ, હે ભોલાનાથ શિવબાબા આપસે 🌟 કિસ્મતકા બુલંદ હૈ વૈસે હર આત્મા કા કિસ્મતકા બુલંદ હો યહી મેરે 💓કી તમન્ના હૈ ઓમશાંતિ ….👆🌛

મારે તો તું એક જ છે, તારે અનેક છે…🌹🌷🌺🌸🌼☺

ઑમશાંતિ,
હે! પ્રાણપ્રિય પ્રાણનાથ,
મેરે પ્યારે પ્યારે મીઠે મીઠે શિવબાબા,
ભક્તિમાર્ગમાં એક ભજન વારંવાર સાંભળ્યુ હતું કે…
તારે તો અનેક છે પણ મારે તો તું એક જ છે, મીંરાના ભજનમાંય તે ગાતી કે મેરે તો ગિરધર ગોપાળ દૂસરો ન કોઈ…આ બિલકુલ સત્ય છે, નૌધા ભક્તિ સર્વોચ્ચ અને ફળદાયી કહેવાય છે. એમ જ્યારે સત્ય પ્રભુનું દર્શન થવું અમૂલ્ય કહેવાય છે, અનેક જન્માન્તરની ભક્તિના પુણ્યફળ સ્વરુપે સત્યમ્ ,શિવમ્, સુન્દરમની મહિમા આ શબ્દો જ કહે છૈપરમાત્મા શિવ એજ સત્ય છે સુન્દર છે તેમનું દર્શન માત્રથી જીવન ધન્ય , સાર્થક બની જાય છે. આજ અંતર આત્માનો પૂર્ણ વિશ્વાસ છે.

બાળપણ ની છબી

 બાળપણની છબી નિહાળી ને હું,

ખુદને પૂછું છું સાચે જ એ છે તુ ?

જીંદગીના આટ્યાપાટ્યા માં,

ક્યાં ખોવાઈ ગઈ’તી તું ?

ચાલને હવે ફરી બની જાઉ

જેવી પહેલા હતી હું ,તો કેવું?

નિર્દોષતા અને અરમાનો કેરું,

શમણું લઈને ઊભેલી તું ,

લાવ ફરીથી કંડારી લઉં

દિલમાં એ છબીને હું.

નથી ખબર વળી પાછી,

ખોવાઈ જઈશ ભીડમાં તું,

ફરી મળાય ના મળાય્ કદી,

છેલ્લી અલવિદા કહી દઉં છું,

અર્પિતા તારી પતવાર છે તું,

હલેસાં માર તારો નાવિક છે પ્રભુ,

મુક્તિ-જીવન-મુક્તિના દ્વારે,

પહોંચી જઈશ તું….ૐ શાંતિ: શાંતિ: શાંતિ:

( ઉષાબેન પટેલ )

એક અનોખો પ્રિયતમ પ્રભુને પત્ર

ushapatel

જુલાઈ,૨૦૧૦ સવાર ૪:૦૦ કલાક

મેરે બાબા, પ્યારે બાબા મીઠે બાબા,

જીંદગી કે સફરમેં ગુજર જાતે હૈં જો મકામ વો ફિર નહીં આતે વો ફિર નહીં આતે તુજસે નારાઝ નહીં એ જીંદગી, હેરાન હું મૈ પરેશાન હું મૈં. જીંદગી તો બેવફા હૈ, એકદિન ઠુકરાયેગી, મૌત મહેબૂબા હૈ તેરી સાથ લેકર જાયેગી. જીંદગી હર કદમ એક નઈ જંગ હૈ, જીત જાયેંગે હમ તુ અગર સંગ હૈ. જીંદગી કૈસી હૈ પહેલી?? હાયે! કભી યે હસાયે કભી યે રુલાયે.

એક દિન મૌત આની હૈ સબકો આજ નહીં તો કલ. ક્યા માર સકેગી મૌત ઉસે ઔરોં કે લીયે જો જીતા હૈ, મિલતા હૈ જહાં કા પ્યાર ઉસે ઔરોં કે લીયે જો જીતા હૈ, જીસને વિષ પીયા બના શંકર જીસને વિષ પીયા બની મીંરા, જીનકો બનના હૈ જગમેં અમર વો લોગ તો મરતે હી આયે..
હે! પરમપિતા પરમાત્મા!, હે દીનાનાથ!, હે અંતરયામી! બાબા, જીવન નાવ બડી મઝધારમેં ફંસી , કોઈ તો રાસ્તા બતાવો, ખડી દોરાહે પર…

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ચહરોે

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ચહેરો સદાય હસતો ગમે સૌને. કોને તેમાં સૂર પૂરાવવાનું ના ગમે?હે દેવા
તમે જો હો હાથી સમ તો અમે મચ્છર સમ, તમે છો અત્તર ક્યારી અમે રુહે ગુલાબ,
તમે છો રુહાની શમા તો હમ હૈ પાગલ પતંગા, લો અબ તો જલ ઉઠી મહેફિલમેં શમા,
તો ફિર જલે ન ક્યૂં પરવાના? તુમ બિન બન જાયે જીવન અપના વિરાના.