पांचों स्वरुप 

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❖ *पाँच स्वरुप की ड्रिल* ❖

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परमपिता परमात्मा ने आकर हमें हमारे 84 जन्मों और सृस्टि के आदि-मध्य-अंत का ज्ञान और स्मृति दिलाई है।जिनमें हमारे 5 स्वरूप का ज्ञान देकर हमें याद दिला रहे हैं कि – बच्चे हम क्या थे? क्या हैं और क्या बनने वाले हैं? जिनके अभ्यास से आत्मा वापस पावन, दिव्य और पुण्य आत्मा बन जाती है।

चारों ओर से ध्यान हटाते हुए अपनी भृकुटि की कुटिया में एक सुन्दर आकर्षक चित्र बनाये। यह जितना कल्पनातीत होगा उतना आपको आनंद आयेगा।
आइये अपने 5 स्वरूपों को जाने और अभ्यास करें –
❖ 1- *अनादि स्वरूप*🌟-
*अनादि स्वरुप में आत्मा बिंदी, बाबा बिंदी मन बुद्धि से पहुँच जाये परमधाम में* –
*अपने अनादि ज्योति स्वरूप को याद करे।परमधाम में*…
मैं मस्तक में चमकती हुई… बहुत ही तेजस्वी आत्मा…कर्मेन्दियों की मालिक…परम पवित्र आत्मा हूँ….मुझसे पवित्र किरणे निकलकर पूरी देह में फैल रही हैं…. इन किरणों से मेरा प्रत्येक अंग पवित्र हो रहा हैं….अब मैं आत्मा उड़ चली ऊपर की ओर…. सूक्ष्मलोक को पार कर… शांतिधाम में हूँ…शांतिधाम की सम्पूर्ण शांति मुझमें समा रही है….इसे महसूस करें….(जितनी देर तक कर सके)
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❖ 2- *आदि स्वरूप*👸-
*आदि स्वरुप – सतयुग में खुद को देवी-देवता स्वरूप में देखना।स्वयं को देवताई ड्रेस में देखना*।
देखे…. अब मैं आत्मा देवलोक में नीचे उतर रही हूँ….स्वर्ग में स्वयं को देखे… अपने देवता स्वरूप को….सुन्दर शरीर….चमकता हुआ चेहरा….डबल ताज… दूर-दूर तक सोने के महल और प्रकृति का सौन्दर्य….सम्पूर्ण सुख-शांति से सम्पन्न दुनिया…. मैं  सिंहासन पर विराजमान…. सर्वगुण सम्पन्न… सम्पूर्ण पवित्र….सतोप्रधान स्टेज में हूँ…
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❖ 3 – *पूज्य स्वरुप*👰-
*अपने पूज्य स्वरूप को याद करे। देखे मंदिरों में मेरी पूजा हो रही है*….
स्वयं को पूज्य स्वरूप में….मंदिर में विराजमान …ईस्ट देव और देवी के रूप में देखें…. हजारों भक्त मेरे दिव्य स्वरुप का दर्शन कर रहे हैं…. मेरे मस्तक से शांति की किरणे निकलकर सभी भक्तो को शांति प्रदान कर रही हैं….उनका मन शांत होता जा रहा है…
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❖ 4 – *ब्राह्मण स्वरुप*🙇-
*ब्राह्मण स्वरुप में स्वयं को संगमयुग में देखें*।
स्वयं भगवान मेरा बाप, टीचर और सतगुरु है….मैं गॉडली स्टूडेंट स्वयं बाप की छत्रछाया में सुरक्षित बैठ रूहानी पढ़ाई पढ़ रही हूँ….मैं सर्वश्रेष्ठ ब्राह्मण आत्मा हूँ… प्रभु पालना में पलने वाली महान आत्मा हूँ….स्वयं भगवान मेरा साथी है….
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❖ 5 – *फ़रिश्ता स्वरूप* 👼-
*अब विज़न बनाये… मैं फरिश्ता हूँ…लाइट माइट …फरिश्ता…देह और देह के बन्धनों से मुक्त*…….
मैं फरिश्ता …प्रकाश के शरीर में….. मेरे अंग-अंग से चारों ओर… लाइट माइट की किरणे…फैल रही हैं…  अब मैं फरिश्ता उड़ चला सूक्ष्म लोक में ….बापदादा मेरे सामने खड़े हैं…. मेरे मस्तक पर- ‘ *विजयी* *भव*: ‘का तिलक लगा रहे हैं…

 

जितनी-जितनी देर आप एक एक स्वरूप में टिकेगें।उतना-उतना आनंद व अनुभूति प्राप्त करेंगे।
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*पाँच स्वरूप योगाभ्यास की दूसरी विधि*

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सबसे पहले हम रिलेक्स होकर बैठे।
जब भी हम बैठक योग करते है तो एक पोजीशन में बैठना है। वैसे तो बाबा✨कहते है बाबा को याद करने के लिए कैसे भी बैठो, लेटो जैसे मर्ज़ी याद करो, पर बैठक योग में जरुरी है पालोथि लगाकर बैठे।और कमर एकदम सीधी हो। आँखें खुली हुई हो, योग के समय आँखें कभी बन्द ना हो। अब जिस तरह से अपने इस रथ की कर्मेंद्रिया समेट कर बैठे है- ठीक उसी तरह से अपने मन और बुद्धि को भी समेट लें-इस दुनिया की सभी स्मृतियो से।

इस दुनिया को दिखते हुए भी ना दिखे।
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💫💫 *योगाभ्यास/ड्रिल*💫💫
🌟 *अनादि स्वरुप* : – अब भृकुटि के बीच में अपना ध्यान केंद्रित करे… देखे कि भृकुटि के बीच में सफ़ेद रंग का एक चमकता हुआ तारा… आत्मा हूँ… मै आत्मा जो पुरे ब्रह्माण्ड की मालिक हूँ…..जब जहाँ चाहू घूम सकती हूँ… अब मै आत्मा इस पांच तत्वों से बने शरीर से निकल पड़ी हूँ… एक लम्बी यात्रा पर…. अब मै आजाद पंछी हूँ

….जहाँ चाहू उड़ सकती हूँ…मुझे किसी का कोई बंधन नहीं….मै चली जा रही हूँ अपने असली घर …शान्तिधाम की ओर… जहाँ शांति ही शांति हैं…. अब मुझ आत्मा को अपने घर आकर कितना सुकून मिल रहा है… अब मै आत्मा कुछ देर आराम कर…फिर से निकल पड़ी अपनी यात्रा पर…
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👸 *आदि स्वरुप* : – अब मै आत्मा अपने आदी स्वरुप में हूँ… अब मै आत्मा यहाँ संपन्न हूँ…गुणों, शक्तियों से भरपूर हूँ… यहाँ सुख, शांति से भरपूर हूँ… ना कुछ पाने की इच्छा -बस प्रेम ही प्रेम हैं…
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👰 *पूज्य स्वरुप* : – अब मै आत्मा अपने पूज्य स्वरुप में हूँ… मै इष्ट देवी हूँ… मै वैष्णो हूँ… मै आत्मा एक बहुत बड़े मंदिर में विराजमान हूँ… और मेरे भक्त मुझसे मिलने के लिए कितने व्याकुल है…. एक दर्शन की आश में कितनी कठिनाइयों को सह रहे है… कितनी लंबी लाइन लगी है… वास्तव में वो भक्त मेरे बच्चे है… और मै उनकी माँ… हर बच्चा अपनी माँ के पास अपनी इच्छा लेकर आया है….मै वैष्णो…सबकी इच्छा को पूर्ण कर रही हूँ…. सबकी मनोकामना पूर्ण कर रही हूँ…. सबकी आँखों में प्यार के आंसू है….
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🙇 *ब्राह्मण स्वरुप* : – अब मै आत्मा अपने ब्राह्मण स्वरुप में हूँ… ब्राह्मण अर्थात ब्रह्मा की संतान… मुझे परमपिता शिव परमात्मा ने ब्रह्मा द्वारा गोद लिया है… मै कितनी खुशनसीब आत्मा हूँ….जो मुझे स्वयं भगवान ने अपनाया है….अपनी गोद में बिठा….प्यार…दुलार दे रहे है….परमपिता शिव परमात्मा ने मुझे अपना वारिस बनाकर अपनी सभी शक्तियां दी है…और अब वही शक्तियां मै आत्मा पुरे विश्व को दे रही हूँ… मै विश्वकल्याणकारी आत्मा हूँ….अब मुझे अपने परमपिता के साथ मददगार बन पुरे विश्व का कल्याण करना है….
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👼 *फरिश्ता स्वरुप* : – अब मै अपने फरिश्ता स्वरुप में आ गयी हूँ….मेरा अब किसी भी देहधारी से कोई रिश्ता नहीं है….मै अब उड़ चली आसमान की ओर…उड़ता पंछी बन… सभी को उमंगो के पंख दे… उड़ाने…आहा उड़ता ही जा रहा हूँ… अब मै फरिश्ता यात्रा कर अपने शरीर मे पुनः विराजमान हो रही हू…..
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❖ *चार धाम की ड्रिल* ❖

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❖ ❖ *चार धाम की यात्रा*:- मन और बुद्धि से चले चार धाम की यात्रा करने के लिये:-
❖ 1. *शांतिस्तंभ( Tower of peace)*
*शक्तिशाली बनना हो तो शांति स्तम्भ पर पहुँच जाओ*।
मैं फरिश्ता बन पहुँच गयी शांति स्तम्भ के पास…कुछ समय के लिये अनुभव कर रही हूँ… सर्वशक्तिमान से सर्वशक्तियों की किरणें प्राप्त करती जा रही हूँ… मैं शांति के सागर से निकलती शांति की लहर हूँ… एक लहर जो सागर से निकलकर, शांति के vibrations चारों ओर बिखेरती हैं… और वापस शांति के सागर में समा जाती हैं… ऐसे मैं कभी अंत को न पाने वाली शांति की लहर हूँ…
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❖ 2. *हिस्ट्री हॉल में( Tower of knowledge)*
*व्यर्थ संकल्प चले और उनसे मुक्त होना हो तो हिस्ट्री हॉल में पहुँच जाओ*।
कुछ समय के लिये अनुभव कर रही हूँ… बाबा को सारा व्यर्थ- किचड़ा सौप रही हूँ… मैं ज्ञान के सागर की ज्ञानवान आत्मा हूँ… जो सारे विश्व में ज्ञान की ज्योत जगाने के निमित्त हैं… सच्चा-सच्चा गीता ज्ञान, जिस ज्ञान को सुनने मात्र से पत्थर बुद्धि मनुष्य- सर्वगुण सम्पन्न,16 कला संपूर्ण देवता बन जाते हैं… परमात्मा शिव का सत्य परिचय विश्व की आत्माओं को सुनाने के निमित्त हूँ…
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❖ 3. *बाबा के कमरे में( Tower of might)*
*बाप समान बनने का संकल्प हो तो बाबा के कमरे में पहुँच जाओ*।
अपने पिता के साथ कुछ समय के लिये अनुभव कर रही हूँ… शक्तियों के भण्डार की मैं शक्तिशाली भुजा हूँ… ये मेरा परम सौभाग्य है की मैं ऑलमाइटी अथॉरिटी,सुप्रीम फादर शिव द्वारा विश्व परिवर्तन के इस महान कर्तव्य में सहयोगी भुजा हूँ…
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❖ 4. *बाबा की झोपड़ी में( Tower of purity)*
*यदि बाबा से रुहरिहान (वार्तालाप) करनी हो तो बाबा की झोपड़ी में चले आओ*।
अपने खुदा दोस्त के साथ अनुभव कर रही हूँ… मेरे खुदा दोस्त को मेरे दिल की सारी बातें बता रही हूँ… पवित्रता के सागर द्वारा चुनी हुई वो महान आत्मा हूँ जिस पर सदैव बाबा ने भरोसा किया हैं… उन्होंने मुझे उस परम पवित्र दुनिया में चलने के लायक समझा… ये मेरी खुशनसीबी है कि मैं परमात्मा द्वारा चुनी हुई ऐसी पवित्र आत्मा बन रही हूँ…..
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✶ ओम शांति ✶

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